नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल 2026 लोकसभा में पास नहीं हो सका। संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक पर शुक्रवार को मतदान हुआ, जिसमें बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े जबकि विरोध में 230 वोट पड़े। जरूरी बहुमत नहीं मिलने के कारण महिला आरक्षण बिल 2026 गिर गया।
यह पिछले 12 वर्षों में पहली बार है जब प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पेश कोई संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो पाया। राजनीतिक जानकार इसे बीजेपी सरकार के लिए बड़ा झटका मान रहे हैं।
महिला आरक्षण बिल 2026 में क्या था?
महिला आरक्षण बिल 2026 का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना था। इस बिल में लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण यानी डीलिमिटेशन से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए थे।
इसके साथ सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी पेश किया था, जिससे नई चुनावी व्यवस्था को परिसीमन ढांचे से जोड़ा जा सके।
सरकार ने विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार
संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि महिला आरक्षण बिल 2026 का गिरना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का ऐतिहासिक मौका गंवा दिया गया।
महिला आरक्षण बिल 2026 का राजनीतिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण बिल 2026 आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। इससे महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बहस तेज होगी।

