महाराष्ट्र विधानसभा ने महाराष्ट्र रिपीलिंग बिल 2026 पारित किया है, जिसके तहत राज्य के 80 पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त (रद्द) किया गया है। इसका उद्देश्य प्रशासन को सरल बनाना, कानूनी जटिलता कम करना और शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाना है।
यह बिल क्यों लाया गया?
राज्य सरकार के अनुसार कई कानून:
- आज के समय में उपयोगी नहीं रहे थे,
- नए कानूनों द्वारा पहले ही बदले जा चुके थे,
- या फिर ब्रिटिश काल के पुराने कानून थे।
इन कानूनों के बने रहने से प्रशासनिक प्रक्रिया और कानूनी व्यवस्था में अनावश्यक भ्रम पैदा होता था। इसलिए सरकार ने इन्हें हटाने का निर्णय लिया।
रद्द किए गए कुछ प्रमुख कानून
इस बिल के तहत कई पुराने कानून हटाए गए, जिनमें शामिल हैं:
- महाराष्ट्र ओपियम स्मोकिंग एक्ट, 1936
- बॉम्बे एबोलिशन ऑफ व्हिपिंग एक्ट, 1957
- लेपर्स (बॉम्बे यूनिफिकेशन) एक्ट, 1959
- बॉम्बे अबकारी एक्ट, 1878
- बॉर्स्टल स्कूल्स एक्ट, 1929
इनमें से कई कानून अब लागू नहीं थे या सामाजिक रूप से अप्रासंगिक माने जाते थे।
80 कानूनों का वर्गीकरण
| क्षेत्र / श्रेणी | कानूनों की संख्या |
|---|---|
| बॉम्बे एक्ट | 24 |
| सेंट्रल प्रोविंसेस और बेरार एक्ट | 8 |
| हैदराबाद एक्ट | 18 |
| मध्य प्रदेश एक्ट | 3 |
| एप्रोप्रिएशन एक्ट | 24 |
इस फैसले का महत्व
1. प्रशासन होगा आसान
सरकारी विभागों को अब पुराने और बेकार कानूनों का रिकॉर्ड संभालने की जरूरत नहीं होगी।
2. कानूनी भ्रम कम होगा
नागरिकों, वकीलों और अधिकारियों के लिए कानूनों को समझना और लागू करना आसान होगा।
3. तेज प्रशासनिक प्रक्रिया
पुराने कानून हटने से सरकारी कार्यों और कानूनी प्रक्रियाओं में देरी कम हो सकती है।
4. व्यापार और निवेश को बढ़ावा
सरल कानूनी ढांचा राज्य में निवेश और “Ease of Doing Business” को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
पृष्ठभूमि
भारत में पिछले कुछ वर्षों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को हटाने का अभियान चल रहा है। केंद्र सरकार भी पहले कई ऐसे कानून रद्द कर चुकी है। महाराष्ट्र का यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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