महाराष्ट्र में गैस संकट: LPG, CNG और PNG की कमी से बढ़ी चिंता, सरकार और कंपनियां अलर्ट

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महाराष्ट्र में गैस संकट पर आधारित हिंदी इन्फोग्राफिक, जिसमें LPG सिलेंडर, गैस एजेंसी के बाहर लगी लंबी लाइनें, CNG स्टेशन पर वाहन और गैस सप्लाई से जुड़ी मुख्य जानकारी दिखाई गई है।
महाराष्ट्र में गैस सप्लाई संकट के चलते कई शहरों में लंबी कतारें देखने को मिलीं। घरेलू उपभोक्ताओं, होटल और उद्योगों पर LPG, CNG और PNG की कमी का असर बढ़ता जा रहा है।

महाराष्ट्र समेत पूरे देश में इन दिनों गैस सप्लाई को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है। खासतौर पर LPG सिलेंडर, CNG और PNG की सप्लाई को लेकर कई शहरों से शिकायतें सामने आ रही हैं। मुंबई, पुणे, ठाणे, नवी मुंबई और औद्योगिक इलाकों में लोगों को गैस सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है, जबकि होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों पर इसका बड़ा असर दिखाई दे रहा है। इस संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा तनाव और Hormuz Strait पर असर को मुख्य वजह माना जा रहा है। भारत अपनी LPG जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है और उसमें भी ज्यादातर सप्लाई खाड़ी देशों से आती है। हाल ही में ईरान-इजराइल और अमेरिका से जुड़े तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई, जिससे देशभर में गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया।

महाराष्ट्र में क्यों बढ़ा गैस संकट?

महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े औद्योगिक और शहरी राज्यों में से एक है। यहां घरेलू रसोई गैस, होटल इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और फैक्ट्रियों में बड़ी मात्रा में LPG, PNG और CNG का इस्तेमाल होता है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG और LPG सप्लाई प्रभावित हुई, इसका असर महाराष्ट्र के शहरों में दिखाई देने लगा।

मुंबई और पुणे में कई कमर्शियल गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें देखने को मिलीं। कुछ इलाकों में होटल मालिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, जिसकी वजह से खाना बनाने में परेशानी हो रही है। कई छोटे रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू तक सीमित कर दिए हैं।

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act, 1955 के तहत विशेष आदेश जारी किया। इस आदेश में गैस सप्लाई को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया। सरकार ने साफ किया कि सबसे पहले घरेलू जरूरतों को पूरा किया जाएगा।

सरकार ने चार प्राथमिक श्रेणियां तय कीं:

  1. घरेलू PNG, CNG और LPG उत्पादन
  2. खाद (Fertilizer) उद्योग
  3. औद्योगिक इकाइयां
  4. कमर्शियल और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क

घरेलू उपयोग के लिए 100% सप्लाई बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, जबकि कुछ उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती की गई है।

PNG वाले ग्राहकों पर नया नियम

सरकार ने एक और बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि जिन लोगों के घरों में PNG कनेक्शन मौजूद है, वे अब LPG सिलेंडर नहीं रख सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे LPG की बचत होगी और जिन इलाकों में PNG उपलब्ध नहीं है, वहां सिलेंडर आसानी से पहुंचाए जा सकेंगे।

हालांकि इस फैसले का कई शहरों में विरोध भी हुआ। पुणे के लोगों ने कहा कि PNG सप्लाई बंद होने या तकनीकी दिक्कत आने पर LPG बैकअप जरूरी होता है।

मुंबई और पुणे में क्या स्थिति है?

मुंबई में Mahanagar Gas Limited (MGL) और पुणे में Maharashtra Natural Gas Limited (MNGL) ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि घरेलू PNG और CNG सप्लाई फिलहाल पूरी तरह चालू है। कंपनियों ने कहा कि प्राथमिकता आम जनता को दी जा रही है।

हालांकि कमर्शियल सेक्टर को झटका लगा है। मुंबई में कई होटल और फूड चेन को मिलने वाली पाइप गैस सप्लाई में लगभग 20% कटौती की गई। इससे होटल इंडस्ट्री पर असर पड़ा।

पुणे में MNGL ने होटल और उद्योगों को तेजी से PNG कनेक्शन देना शुरू किया है। कई MIDC क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाए गए ताकि छोटे उद्योग जल्द पाइप गैस से जुड़ सकें।

होटल और छोटे उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित

गैस संकट का सबसे बड़ा असर होटल, ढाबों और छोटे उद्योगों पर देखा जा रहा है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से लागत बढ़ गई है। कई जगहों पर सिलेंडर मिलने में देरी हो रही है।

कुछ छोटे रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि उन्हें ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। वहीं कुछ उद्योगों ने उत्पादन कम कर दिया है क्योंकि उन्हें गैस की पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही।

क्या घरेलू उपभोक्ताओं को डरने की जरूरत है?

सरकार और गैस कंपनियों का कहना है कि आम घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। घरेलू गैस सप्लाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। साथ ही सरकार ने जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं।

Delivery Authentication Code (DAC) सिस्टम को मजबूत किया गया है ताकि कोई सिलेंडर गलत तरीके से बेचा न जा सके। सरकार के मुताबिक 96% LPG डिलीवरी अब DAC के जरिए verify की जा रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय संकट का भारत पर असर

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Middle East में तनाव लंबा चलता है तो भारत को आगे भी गैस और तेल सप्लाई में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। Hormuz Strait दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर सीधे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है।

इसी वजह से भारत अब अमेरिका, कनाडा, रूस और नॉर्वे जैसे देशों से LPG खरीद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हो सके।

महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन की तैयारी

महाराष्ट्र सरकार ने सभी गैस कंपनियों और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा है। कई शहरों में 24×7 हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग शुरू की गई है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा न करें।

साथ ही PNG नेटवर्क तेजी से बढ़ाया जा रहा है ताकि आने वाले समय में सिलेंडर पर निर्भरता कम की जा सके। पुणे, मुंबई और औद्योगिक इलाकों में नई पाइपलाइन बिछाने का काम तेज कर दिया गया है।

आगे क्या हो सकता है?

अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य होते हैं तो गैस सप्लाई में सुधार आ सकता है। लेकिन अगर तनाव जारी रहा तो कमर्शियल सेक्टर और उद्योगों पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल सरकार की कोशिश यही है कि घरेलू रसोई गैस और सार्वजनिक परिवहन के लिए CNG सप्लाई प्रभावित न हो।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट भारत के लिए एक चेतावनी भी है कि देश को तेजी से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और घरेलू गैस उत्पादन पर ध्यान देना होगा। आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क विस्तार, बायोगैस और इलेक्ट्रिक विकल्पों पर ज्यादा जोर देखने को मिल सकता है।

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