
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। सरकारी तेल कंपनियों ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। ताज़ा बढ़ोतरी में पेट्रोल और डीजल लगभग 90 पैसे प्रति लीटर महंगे हुए हैं। इससे पहले भी करीब ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें इसका मुख्य कारण हैं। अमेरिका-ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है।
सरकार का कहना है कि सरकारी तेल कंपनियां लगातार घाटे में चल रही थीं और उन्हें रोजाना भारी नुकसान हो रहा था। इसी वजह से कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया।
किन शहरों में कितना महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल?
ताज़ा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹98.64 प्रति लीटर और डीजल ₹91.58 प्रति लीटर तक पहुंच गया है।
महाराष्ट्र में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम (MSRTC) ने बढ़ती डीजल कीमतों के कारण बस किराया बढ़ाने पर विचार शुरू कर दिया है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “आर्थिक तूफान” की शुरुआत बताते हुए कहा कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता सरकार की गलत आर्थिक नीतियों की कीमत चुका रही है।
दूसरी ओर भाजपा और NDA नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं बल्कि वैश्विक संकट का असर है। उनका दावा है कि कई देशों की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतें उतनी तेजी से नहीं बढ़ीं जितनी अन्य अर्थव्यवस्थाओं में देखी जा रही हैं।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव पूरे बाजार और आम जीवन पर पड़ता है।
संभावित असर:
- ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे हो सकते हैं
- सब्जियों और राशन की कीमतें बढ़ सकती हैं
- टैक्सी, ऑटो और बस किराया बढ़ सकता है
- छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी
- घरेलू बजट पर दबाव बढ़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं, तो आने वाले दिनों में महंगाई और तेज हो सकती है।
क्या सरकार टैक्स कम कर सकती है?
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों का बड़ा हिस्सा टैक्स से जुड़ा होता है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स कुल कीमत का लगभग आधा हिस्सा बनाते हैं। ऐसे में जनता की मांग है कि सरकार टैक्स में राहत देकर कीमतें कम करे।
हालांकि सरकार फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों का हवाला दे रही है और संकेत दे रही है कि संकट लंबा खिंच सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के केंद्र में रहने वाली हैं।
| महीना | पेट्रोल कीमत (₹/लीटर)* | डीजल कीमत (₹/लीटर)* | प्रमुख अपडेट |
|---|---|---|---|
| मई 2025 | ₹94.72 | ₹87.62 | देशभर में ईंधन कीमतें स्थिर रहीं |
| जून 2025 | ₹94.72 | ₹87.62 | कोई बड़ा बदलाव नहीं |
| जुलाई 2025 | ₹95.10 | ₹88.05 | कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी |
| अगस्त 2025 | ₹95.45 | ₹88.40 | ट्रांसपोर्ट लागत बढ़नी शुरू |
| सितंबर 2025 | ₹96.20 | ₹89.00 | वैश्विक मांग का असर |
| अक्टूबर 2025 | ₹97.10 | ₹89.80 | त्योहार सीजन में मांग बढ़ी |
| नवंबर 2025 | ₹98.00 | ₹90.20 | आयात लागत और टैक्स का असर |
| दिसंबर 2025 | ₹99.30 | ₹91.10 | अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा |
| जनवरी 2026 | ₹100.15 | ₹92.00 | नए साल में महंगाई का दबाव |
| फरवरी 2026 | ₹101.40 | ₹93.10 | वैश्विक तनाव से कीमतों में तेजी |
| मार्च 2026 | ₹102.80 | ₹94.20 | लॉजिस्टिक्स और परिवहन महंगा |
| अप्रैल 2026 | ₹103.54 | ₹95.64 | बड़ी बढ़ोतरी से पहले कीमतें स्थिर |
| मई 2026 | ₹98.64 – ₹106.68 | ₹91.58 – ₹98.90 | 4 साल बाद बड़ी बढ़ोतरी, पश्चिम एशिया संकट का असर |
मुख्य बातें
- साल 2025 में पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादातर स्थिर रहीं।
- मई 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद भारत में ईंधन महंगा हुआ।
- मई 2026 में एक ही सप्ताह में दो बार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए।
- पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता इसका मुख्य कारण बनी।
- ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, राशन, सब्जियों और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
