सूचना के अधिकार (RTI) कानून को लेकर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। आयोग के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रियों को RTI Act के तहत पूछे गए सवालों का जवाब देना होगा।
यह फैसला आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे सरकारी जवाबदेही और पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी।
क्या है पूरा मामला
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा है कि केंद्र और राज्य कैबिनेट के मंत्री “पब्लिक अथॉरिटी” (Public Authority) के दायरे में आते हैं और इसलिए उन्हें RTI Act के तहत पूछे गए सवालों का जवाब देना होगा।
इस फैसले के बाद नागरिक RTI आवेदन के माध्यम से सीधे किसी मंत्री से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं।
CIC ने क्या कहा
केंद्रीय सूचना आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मंत्रियों के कार्यालयों को RTI कानून के तहत आवश्यक व्यवस्था करनी होगी।
आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों को यह भी सुझाव दिया है कि मंत्रियों के कार्यालयों में Public Information Officers (PIO) और First Appellate Authorities की नियुक्ति की जाए, ताकि RTI आवेदन का जवाब समय पर दिया जा सके।
फैसले का क्या होगा असर
इस फैसले के बाद आम लोगों के लिए सरकार के कामकाज से जुड़े सवाल पूछना और जानकारी प्राप्त करना आसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
केंद्रीय सूचना आयोग का यह फैसला RTI कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे नागरिकों को सरकार और मंत्रियों से सीधे जानकारी मांगने का अधिकार और मजबूत होगा।
FAQs
प्रश्न: RTI Act क्या है?
उत्तर: RTI Act यानी सूचना का अधिकार कानून, जिसके तहत नागरिक सरकारी संस्थाओं से जानकारी मांग सकते हैं।
प्रश्न: क्या मंत्री RTI के तहत जवाब देने के लिए बाध्य होंगे?
उत्तर: केंद्रीय सूचना आयोग के अनुसार मंत्री भी RTI के तहत जवाबदेह माने जाएंगे।
प्रश्न: RTI आवेदन कैसे किया जाता है?
उत्तर: कोई भी नागरिक ऑनलाइन या लिखित आवेदन देकर RTI के तहत जानकारी मांग सकता है।
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