

मुंबई | विशेष रिपोर्ट
मुंबई के L Ward क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण का एक मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और प्रवर्तन तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित निर्माण के खिलाफ 24 जनवरी 2025 को धारा 354A के तहत नोटिस जारी की गई थी। इसके बाद, लगभग छह महीने की अवधि बीतने के पश्चात 24 जुलाई 2025 को स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया गया।
इतना ही नहीं, वर्ष 2025 में संबंधित निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण (Demolition) की कार्रवाई भी की गई और ध्वस्तीकरण पर हुए खर्च की वसूली के लिए डिमांड नोटिस भी जारी किया गया। सामान्य परिस्थितियों में इन सभी कार्यवाहियों के बाद यह माना जाता है कि संबंधित निर्माण के विरुद्ध प्रशासन ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन सभी कदमों के बावजूद लगभग चार महीने बाद उसी स्थान पर निर्माण कार्य कथित रूप से फिर से शुरू हो गया। इतना ही नहीं, यह निर्माण दो अतिरिक्त मंजिलों तक पहुंचने की बात सामने आ रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर कैसे दोबारा शुरू हुआ निर्माण?
यदि प्रशासन ने नोटिस जारी की, स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की और ध्वस्तीकरण खर्च की वसूली का नोटिस भी जारी किया, तो फिर उसी स्थान पर निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की अनुमति किसने दी?
क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई?
दो अतिरिक्त मंजिलें कैसे बन गईं?
निर्माण कार्य यदि वास्तव में दोबारा शुरू हुआ, तो वह दो अतिरिक्त मंजिलों तक कैसे पहुंच गया? क्या इस दौरान किसी स्तर पर निगरानी नहीं की गई? क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी, या फिर शिकायतों के बावजूद आंखें मूंद ली गईं?
MRTP Act के तहत कार्रवाई क्यों नहीं?
यदि यह निर्माण नियमों के विपरीत था, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट (MRTP Act) के तहत आपराधिक अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या केवल नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर्याप्त मानी गई?
सबसे बड़ा सवाल – स्टे मिला कैसे?
पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जब नोटिस, स्पीकिंग ऑर्डर, ध्वस्तीकरण और खर्च वसूली जैसी कार्यवाहियां पहले ही पूरी हो चुकी थीं, तब संबंधित पक्ष को अदालत से स्टे (Stay) आखिर किस आधार पर मिला?
क्या अदालत के समक्ष सभी तथ्य रखे गए थे? यदि रखे गए थे, तो स्टे के पीछे क्या परिस्थितियां थीं? और यदि नहीं रखे गए, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
कथित मिलीभगत के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि ठेकेदार अनीस तथा L Ward के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने आए और यदि आरोप निराधार हैं तो उन्हें स्पष्ट किया जाए।
जवाबदेही तय होना जरूरी
यह मामला केवल एक निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के समान अनुपालन से जुड़ा हुआ है। यदि नोटिस, स्पीकिंग ऑर्डर, ध्वस्तीकरण और खर्च वसूली जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भी निर्माण दोबारा शुरू हो सकता है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब जनता यह जानना चाहती है कि:
- जिम्मेदार कौन है?
- कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- दोबारा निर्माण की अनुमति किसने दी?
- और आखिर कोर्ट से स्टे मिला कैसे?
इन सवालों के जवाब केवल इस मामले के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में कानून के निष्पक्ष और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
(अस्वीकरण: इस रिपोर्ट में उल्लिखित कथित मिलीभगत से जुड़े आरोप सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों और स्थानीय स्तर पर सामने आए दावों पर आधारित हैं। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)
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